भगवद गीता के दिव्य कोट्स

भगवद गीता के प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक और दिव्य कोट्स हिंदी में। 18 अध्यायों और 700 श्लोकों से चुने हुए महत्वपूर्ण उपदेश जो मानव जाति को सन्मार्ग दिखाते हैं।

गीता

श्रीमद्भगवद्गीता

18 अध्याय, 700 श्लोक, अनंत ज्ञान

18
अध्याय
200+
कोट्स
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गीता के अध्याय

18 अध्याय, 700 श्लोक

लोकप्रिय गीता श्लोक

200+ कोट्स
कर्म करने में तुम्हारा अधिकार है, फल में नहीं। कभी भी फल की इच्छा से कर्म मत करो।
अध्याय 2, श्लोक 47
22,154
7,892
जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं स्वयं को प्रकट करता हूँ।
अध्याय 4, श्लोक 7
25,789
9,432
अपने कर्तव्य का पालन करो, क्योंकि कर्म न करने से कर्तव्य पालन श्रेष्ठ है।
अध्याय 3, श्लोक 8
19,876
6,543
सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय में समभाव रखने वाला योगी पाप से मुक्त होता है।
अध्याय 2, श्लोक 38
17,654
5,432
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
अध्याय 18, श्लोक 66
21,098
7,654
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥
अध्याय 2, श्लोक 23
16,789
5,098
जो व्यक्ति फल की इच्छा छोड़कर कर्म करता है, वही सच्चा संन्यासी है।
अध्याय 6, श्लोक 1
18,432
6,789
भक्ति से परिपूर्ण हृदय वाला भक्त मुझे अत्यंत प्रिय है।
अध्याय 12, श्लोक 14
15,678
4,321
जिसने अपने मन को वश में कर लिया है, वही सच्चा योगी है।
अध्याय 6, श्लोक 18
14,567
3,890
ज्ञानी व्यक्ति सभी प्राणियों में एक ही आत्मा को देखता है।
अध्याय 13, श्लोक 28
13,456
3,210
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।
अध्याय 4, श्लोक 8
18,765
6,543
मैं सब प्राणियों का आत्मा हूँ, सबके हृदय में विराजमान हूँ।
अध्याय 10, श्लोक 20
20,432
8,765

विषय अनुसार कोट्स