भगवद गीता के दिव्य कोट्स
भगवद गीता के प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक और दिव्य कोट्स हिंदी में। 18 अध्यायों और 700 श्लोकों से चुने हुए महत्वपूर्ण उपदेश जो मानव जाति को सन्मार्ग दिखाते हैं।
श्रीमद्भगवद्गीता
18 अध्याय, 700 श्लोक, अनंत ज्ञान
18
अध्याय
200+
कोट्स
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गीता के अध्याय
18 अध्याय, 700 श्लोक
1
अर्जुनविषादयोग
47 श्लोक
2
सांख्ययोग
72 श्लोक
3
कर्मयोग
43 श्लोक
4
ज्ञानकर्मसन्यासयोग
42 श्लोक
5
कर्मसन्यासयोग
29 श्लोक
6
आत्मसंयमयोग
47 श्लोक
7
ज्ञानविज्ञानयोग
30 श्लोक
8
अक्षरब्रह्मयोग
28 श्लोक
9
राजविद्याराजगुह्ययोग
34 श्लोक
10
विभूतियोग
42 श्लोक
11
विश्वरूपदर्शनयोग
55 श्लोक
12
भक्तियोग
20 श्लोक
13
क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग
35 श्लोक
14
गुणत्रयविभागयोग
27 श्लोक
15
पुरुषोत्तमयोग
20 श्लोक
16
दैवासुरसम्पद्विभागयोग
24 श्लोक
17
श्रद्धात्रयविभागयोग
28 श्लोक
18
मोक्षसंन्यासयोग
78 श्लोक
लोकप्रिय गीता श्लोक
200+ कोट्स
कर्म करने में तुम्हारा अधिकार है, फल में नहीं। कभी भी फल की इच्छा से कर्म मत करो।
जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं स्वयं को प्रकट करता हूँ।
अपने कर्तव्य का पालन करो, क्योंकि कर्म न करने से कर्तव्य पालन श्रेष्ठ है।
सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय में समभाव रखने वाला योगी पाप से मुक्त होता है।
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥
जो व्यक्ति फल की इच्छा छोड़कर कर्म करता है, वही सच्चा संन्यासी है।
भक्ति से परिपूर्ण हृदय वाला भक्त मुझे अत्यंत प्रिय है।
जिसने अपने मन को वश में कर लिया है, वही सच्चा योगी है।
ज्ञानी व्यक्ति सभी प्राणियों में एक ही आत्मा को देखता है।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।
मैं सब प्राणियों का आत्मा हूँ, सबके हृदय में विराजमान हूँ।