भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य कोट्स

भगवान श्रीकृष्ण के प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक और दिव्य कोट्स हिंदी में। गीता के श्लोक, जीवन शिक्षाएं और आध्यात्मिक विचार जो मानव जाति को सन्मार्ग दिखाते हैं।

श्री

भगवान श्रीकृष्ण

विष्णु के आठवें अवतार, दिव्य शिक्षक और गीता के उपदेशक

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जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं स्वयं को प्रकट करता हूँ।
भगवद गीता 4:7
25,789
9,432
5,678
कर्म करने में तुम्हारा अधिकार है, फल में नहीं। कभी भी फल की इच्छा से कर्म मत करो।
भगवद गीता 2:47
22,154
7,892
4,567
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।
भगवद गीता 4:8
18,765
6,543
3,890
मैं सब प्राणियों का आत्मा हूँ, सबके हृदय में विराजमान हूँ।
भगवद गीता 10:20
20,432
8,765
4,321
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
भगवद गीता 18:66
21,098
7,654
4,098
अपने कर्तव्य का पालन करो, क्योंकि कर्म न करने से कर्तव्य पालन श्रेष्ठ है।
भगवद गीता 3:8
19,876
6,543
3,890
सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय में समभाव रखने वाला योगी पाप से मुक्त होता है।
भगवद गीता 2:38
17,654
5,432
3,210
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥
भगवद गीता 2:23
16,789
5,098
2,876
जो व्यक्ति फल की इच्छा छोड़कर कर्म करता है, वही सच्चा संन्यासी है।
भगवद गीता 6:1
18,432
6,789
3,456
भक्ति से परिपूर्ण हृदय वाला भक्त मुझे अत्यंत प्रिय है।
भगवद गीता 12:14
15,678
4,321
2,109
जिसने अपने मन को वश में कर लिया है, वही सच्चा योगी है।
भगवद गीता 6:18
14,567
3,890
1,876
ज्ञानी व्यक्ति सभी प्राणियों में एक ही आत्मा को देखता है।
भगवद गीता 13:28
13,456
3,210
1,543

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