भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य कोट्स
भगवान श्रीकृष्ण के प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक और दिव्य कोट्स हिंदी में। गीता के श्लोक, जीवन शिक्षाएं और आध्यात्मिक विचार जो मानव जाति को सन्मार्ग दिखाते हैं।
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जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं स्वयं को प्रकट करता हूँ।
कर्म करने में तुम्हारा अधिकार है, फल में नहीं। कभी भी फल की इच्छा से कर्म मत करो।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।
मैं सब प्राणियों का आत्मा हूँ, सबके हृदय में विराजमान हूँ।
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
अपने कर्तव्य का पालन करो, क्योंकि कर्म न करने से कर्तव्य पालन श्रेष्ठ है।
सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय में समभाव रखने वाला योगी पाप से मुक्त होता है।
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥
जो व्यक्ति फल की इच्छा छोड़कर कर्म करता है, वही सच्चा संन्यासी है।
भक्ति से परिपूर्ण हृदय वाला भक्त मुझे अत्यंत प्रिय है।
जिसने अपने मन को वश में कर लिया है, वही सच्चा योगी है।
ज्ञानी व्यक्ति सभी प्राणियों में एक ही आत्मा को देखता है।